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“मेरिट में चमके GPM के तीन सितारे : शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों की मेहनत ने जिले को दिलाई नई पहचान- डीईओ रजनीश तिवारी 

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12वीं बोर्ड परिणाम में जिले के 3 विद्यार्थियों ने बनाई प्रदेश मेरिट में जगह, शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की खुली तस्वीर

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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही।छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा घोषित कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा परिणाम ने इस बार गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की तस्वीर ही बदलकर रख दी है। कभी कमजोर परीक्षा परिणाम, बदहाल शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक उदासीनता को लेकर चर्चा में रहने वाला जीपीएम जिला अब प्रदेश की मेरिट सूची में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराकर सुर्खियों में है।

इस वर्ष जिले के तीन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने पूरे छत्तीसगढ़ की मेरिट सूची में स्थान हासिल कर न केवल अपने परिवार और विद्यालय का नाम रोशन किया है, बल्कि पूरे जिले को गौरवान्वित कर दिया है।

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प्रदेश मेरिट में 4वीं रैंक – ताहिरा ख़ान,छात्रा – स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम स्कूल, भर्रापारा पेंड्रा, प्रदेश मेरिट में 5वीं रैंक – ओंकार केवट,छात्र – शासकीय मल्टी पर्पस स्कूल, पेंड्रा प्रदेश मेरिट में 7वीं रैंक – भूमिका परतोती, छात्रा – स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल, भर्रापारा पेंड्रा

तीनों विद्यार्थियों की इस शानदार सफलता के बाद पूरे जिले में खुशी, गर्व और उत्साह का माहौल है। स्कूल परिसरों में मिठाइयाँ बांटी जा रही हैं, शिक्षकों को बधाइयाँ मिल रही हैं और अभिभावकों के चेहरे गर्व से चमक उठे हैं।लेकिन इस सफलता की सबसे बड़ी चर्चा केवल मेरिट तक सीमित नहीं है, बल्कि उस बदलाव को लेकर भी है जिसने GPM जिले की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी है।

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जब जीपीएम का रिजल्ट बना था चिंता का विषय…!

कुछ वर्ष पहले तक गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले का परीक्षा परिणाम प्रदेश में बेहद खराब माना जाता था। तत्कालीन प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी जे.के. शास्त्री के कार्यकाल के दौरान जिले की शिक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते रहे। जिले में खराब रिजल्ट का रिकॉर्ड बनाए हुए थे, कई स्कूलों में शैक्षणिक गुणवत्ता कमजोर रही, विद्यार्थियों की तैयारी प्रभावित हुई और बोर्ड परिणामों में जिले का प्रदर्शन निराशाजनक रहा।

शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली, मॉनिटरिंग की कमी और स्कूल स्तर पर कमजोर शैक्षणिक नियंत्रण को लेकर जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों और आम लोगों के बीच नाराजगी देखने को मिली थी। उस समय जिले के खराब रिजल्ट ने शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए थे।

अब बदली तस्वीर, बदला परिणाम…

वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी के कार्यकाल में जिले की शिक्षा व्यवस्था में कई स्तर पर बदलाव देखने को मिले। नियमित स्कूल निरीक्षण, शिक्षकों की जवाबदेही तय करना, परीक्षा पूर्व विशेष तैयारी, कमजोर विद्यार्थियों पर फोकस और लगातार शैक्षणिक मॉनिटरिंग का सीधा असर इस बार बोर्ड परीक्षा परिणामों में दिखाई दिया। जिस जिले को कभी खराब परीक्षा परिणाम के लिए आलोचना झेलनी पड़ती थी, वही जिला अब प्रदेश की मेरिट सूची में तीन विद्यार्थियों के चयन के साथ शिक्षा गुणवत्ता का उदाहरण बनता दिखाई दे रहा है।

केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने दी बधाई

जिले की इस बड़ी उपलब्धि पर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने स्वयं जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी को फोन कर बधाई दी। उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों और शिक्षा विभाग की पूरी टीम को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह परिणाम जिले के लिए गर्व का विषय है।

सूत्रों के अनुसार मंत्री ने जिले में शिक्षा गुणवत्ता सुधार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यदि इसी तरह शिक्षा व्यवस्था पर लगातार काम होता रहा तो आने वाले वर्षों में जीपीएम जिला प्रदेश के टॉप शिक्षा जिलों में शामिल हो सकता है।

सवाल भी उठ रहे हैं…

इस शानदार परिणाम के बाद अब जिले में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि यदि पहले से ही शिक्षा गुणवत्ता पर गंभीरता दिखाई जाती, तो शायद गौरेला पेंड्रा मरवाही जिला वर्षों पहले ही बेहतर परिणाम देने लगता। लोगों का कहना है कि शिक्षा विभाग में केवल पद पर बैठे रहना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि परिणाम देने वाली कार्यशैली ही वास्तविक पहचान बनाती है।

आज जिले के विद्यार्थियों ने यह साबित कर दिया है कि सही मार्गदर्शन, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और ईमानदार मॉनिटरिंग मिलने पर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चे भी प्रदेश स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकते हैं।

गौरेला पेंड्रा मरवाही का यह परिणाम केवल मेरिट सूची में नाम आने की खबर नहीं, बल्कि उस बदलाव की कहानी है जिसने यह साबित किया है कि इच्छाशक्ति और जवाबदेही हो तो बदहाल शिक्षा व्यवस्था को भी सफलता के मॉडल में बदला जा सकता है।

डीईओ रजनीश तिवारी ने कहा —

“गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के विद्यार्थियों ने इस बार जो उपलब्धि हासिल की है, वह पूरे जिले के लिए गर्व की बात है। प्रदेश की मेरिट सूची में हमारे तीन विद्यार्थियों का स्थान बनाना यह साबित करता है कि मेहनत, अनुशासन और सही मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे भी बड़े मुकाम हासिल कर सकते हैं।

यह सफलता केवल विद्यार्थियों की नहीं, बल्कि शिक्षकों, अभिभावकों और शिक्षा विभाग की पूरी टीम की सामूहिक मेहनत का परिणाम है। पिछले कुछ समय से जिले में शिक्षा गुणवत्ता सुधार, नियमित मॉनिटरिंग, अतिरिक्त कक्षाओं और परीक्षा तैयारी पर विशेष फोकस किया गया था, जिसका सकारात्मक परिणाम आज देखने को मिला है।

हमारा प्रयास केवल रिजल्ट बेहतर करना नहीं, बल्कि जिले में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का वातावरण तैयार करना है। आने वाले समय में भी शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा अधिक से अधिक विद्यार्थियों को प्रदेश मेरिट में स्थान दिलाने के लिए लगातार कार्य किया जाएगा।”

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